नई दिल्ली, 2 अगस्त 2026। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने भारतीय धान की किस्मों के व्यावसायिक उपयोग से प्राप्त लाभ के तहत अनुसंधान संस्थानों और राज्यों को कुल ₹8.22 करोड़ जारी किए हैं। इसे धान के क्षेत्र में अब तक के सबसे बड़े एकमुश्त एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) वितरण में से एक माना जा रहा है।
यह राशि अंतरराष्ट्रीय बीज कंपनी M/s Pioneer Overseas Corporation से प्राप्त हुई थी। कंपनी ने भारतीय धान (Oryza sativa) की किस्मों का उपयोग कर हाइब्रिड विकसित और उनका व्यावसायीकरण किया था। NBA के अनुसार, इस भुगतान का उद्देश्य भारत के जैविक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से होने वाले लाभ को संबंधित संस्थानों और राज्यों के साथ न्यायसंगत एवं समान रूप से साझा करना है।
अनुसंधान संस्थानों को ₹2.47 करोड़
कुल राशि में से ₹2.47 करोड़ उन अनुसंधान संस्थानों को दिए गए हैं, जिन्होंने धान की संबंधित किस्मों का संरक्षण किया और उन्हें कंपनी के साथ साझा किया था।
ICAR-Indian Institute of Rice Research, Hyderabad को सबसे बड़ी राशि ₹2.43 करोड़ प्राप्त हुई है। वहीं, Govind Ballabh Pant University of Agriculture and Technology, Uttarakhand को उसके द्वारा उपलब्ध कराई गई विशिष्ट धान की किस्म के लिए ₹3.26 लाख दिए गए हैं।
33 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को ₹5.75 करोड़
NBA ने 33 State Biodiversity Boards और Union Territory Biodiversity Councils को कुल ₹5.75 करोड़ जारी किए हैं। यह राशि संबंधित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के धान उत्पादन क्षेत्र के आधार पर निर्धारित की गई है।
आंकड़े कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के Unified Portal for Agricultural Statistics में उपलब्ध धान उत्पादक क्षेत्र के आंकड़ों के आधार पर तय किए गए हैं।
इस वितरण में उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक ₹73.26 लाख मिले हैं।
शीर्ष 10 राज्यों को मिली राशि
| क्रम | राज्य | राशि |
|---|---|---|
| 1 | उत्तर प्रदेश | ₹73,26,225 |
| 2 | पश्चिम बंगाल | ₹64,94,795 |
| 3 | तेलंगाना | ₹50,59,674 |
| 4 | ओडिशा | ₹48,09,040 |
| 5 | छत्तीसगढ़ | ₹45,90,940 |
| 6 | पंजाब | ₹37,14,926 |
| 7 | बिहार | ₹36,93,237 |
| 8 | मध्य प्रदेश | ₹36,16,118 |
| 9 | असम | ₹27,78,664 |
| 10 | आंध्र प्रदेश | ₹25,88,278 |
धान की खेती का क्षेत्रफल कम होने के बावजूद सिक्किम और अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह जैसे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को भी उनके अनुपात के अनुसार राशि आवंटित की गई है।
संरक्षण और किसानों के हित में होगा उपयोग
अनुसंधान संस्थान इस राशि का इस्तेमाल जर्मप्लाज्म संरक्षण, बीज संग्रह के रखरखाव, अनुसंधान और प्रशिक्षण को मजबूत करने में करेंगे।
वहीं, State Biodiversity Boards और Union Territory Biodiversity Councils इन निधियों का उपयोग स्वीकृत संरक्षण गतिविधियों में करेंगे। इनमें देशी फसल विविधता का संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र का पुनर्स्थापन, पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण और स्थानीय किसानों एवं ज्ञान धारकों को सहयोग जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
कृषि और बीज क्षेत्र से अब तक ₹83 करोड़ का ABS भुगतान
NBA के अनुसार, कृषि और बीज क्षेत्र से उसे अब तक लगभग ₹83 करोड़ का ABS भुगतान प्राप्त हो चुका है। सभी क्षेत्रों को मिलाकर NBA द्वारा किया गया कुल ABS वितरण ₹162 करोड़ से अधिक हो गया है।
यह व्यवस्था भारत के जैविक संसाधनों और उनसे जुड़े पारंपरिक ज्ञान के व्यावसायिक उपयोग से होने वाले आर्थिक लाभ में स्थानीय हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
वैश्विक जैव विविधता लक्ष्यों से जुड़ी पहल
NBA के अनुसार, यह पहल Kunming-Montreal Global Biodiversity Framework के Target 13 में निर्धारित उस लक्ष्य के अनुरूप है, जिसमें आनुवंशिक संसाधनों और उनसे जुड़े पारंपरिक ज्ञान के उपयोग से होने वाले लाभों के न्यायसंगत एवं समान बंटवारे पर जोर दिया गया है।
इसके अलावा यह पहल सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के कई लक्ष्यों से भी जुड़ती है, जिनमें SDG 2—Zero Hunger, SDG 12—Responsible Consumption and Production, SDG 15—Life on Land और SDG 17—Partnerships for the Goals प्रमुख हैं।
क्या है राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण?
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत गठित एक वैधानिक निकाय है। इसकी स्थापना जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत की गई थी।
NBA भारत के जैविक संसाधनों और उनसे जुड़े पारंपरिक ज्ञान तक पहुंच को विनियमित करने तथा उनके उपयोग से होने वाले लाभों का न्यायसंगत और समान वितरण सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करता है। यह Nagoya Protocol में निर्धारित fair and equitable benefit-sharing के सिद्धांत को लागू करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
source: by PIB Delhi #HindiNews #DigitalNews #LOKMUDDA #लोकमुद्दा #उत्तरप्रदेश #छात्रवृत्ति #IndianConstitution #KnowYourNation #lokmudda #indian #civics #democracy #DigitalMedia #UttarPradesh #india #news #up #जनहित #UPNews



