लखनऊ, 16 अगस्त 2026। उत्तर प्रदेश में ग्रामसभा की जमीन से जुड़े मामलों में अनियमितता और जमीन को खुर्द-बुर्द करने के प्रयासों पर अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। चकबंदी आयुक्त डॉ. ऋषिकेश भास्कर यशोद ने चकबंदी अधिकारियों द्वारा निस्तारित किए जा रहे वादों में पारित आदेशों की समीक्षा के बाद अधिकारियों को इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किए हैं।
फर्जी आदेशों के आधार पर जमीन हड़पने के प्रयास पर नजर
समीक्षा में सामने आया कि कुछ मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ग्रामसभा की मूल्यवान भूमि को खुर्द-बुर्द करने का प्रयास किया गया। साथ ही, कूटरचित आदेशों के आधार पर वादों का निस्तारण किए जाने की बात भी सामने आई है।
जिलाधिकारी की लिखित अनुमति जरूरी
निर्देशों के अनुसार ऐसे स्थानांतरण आवेदन या पत्रावलियां, जिनमें ग्रामसभा का हित जुड़ा हो और किसी वाद को दूसरे जनपद में स्थानांतरित करना जरूरी हो, उनमें संबंधित जिलाधिकारी अथवा जिला उपसंचालक चकबंदी की पूर्व लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा। ग्रामसभा की भूमि से संबंधित आदेशों के अमल से पहले भी संबंधित अधिकारी की लिखित पूर्वानुमति आवश्यक होगी।
जमीन खुर्द-बुर्द करने का प्रयास हुआ तो FIR
चकबंदी आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि यदि ग्रामसभा की भूमि को खुर्द-बुर्द करने का प्रयास संज्ञान में आता है तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराने के साथ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए निदेशालय को प्रस्ताव उपलब्ध कराया जाए।
महराजगंज के 18 वनटांगिया गांव चकबंदी से बाहर
महराजगंज जनपद के 18 वनटांगिया ग्रामों को चकबंदी प्रक्रिया से पृथक कर दिया गया है। चकबंदी प्रक्रिया संभव न होने के कारण जिलाधिकारी, महराजगंज ने उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा 6(1) के तहत इन गांवों को चकबंदी से अलग करने का प्रस्ताव भेजा था। इसके बाद जनहित में 12 अगस्त 2026 की अधिसूचना के माध्यम से इन 18 गांवों को चकबंदी प्रक्रिया से पृथक किया गया।
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