लखनऊ, 16 अगस्त 2026। उत्तर प्रदेश में चकबंदी प्रक्रिया को तेज करने के लिए चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद द्वारा अधिकारियों को लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य किसानों को सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ समय पर उपलब्ध कराना है।
38 वर्षों से लंबित गांव को प्रक्रिया से किया गया अलग
चकबंदी आयुक्त के निर्देशों के क्रम में ऐसे गांव, जहां विशेष परिस्थितियों के कारण चकबंदी की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही थी, उन्हें उत्तर प्रदेश चकबंदी अधिनियम की धारा-6(1) के तहत चकबंदी प्रक्रिया से पृथक करने के निर्देश दिए गए।
इन परिस्थितियों में ग्राम के विकास योजना के अंतर्गत आने, नदी कटान से प्रभावित होने, चकबंदी योग्य क्षेत्रफल 40 प्रतिशत से कम होने, औद्योगिक विकास क्षेत्र में शामिल होने तथा गुटबंदी एवं दलगत विवाद जैसी स्थितियां शामिल हैं।
चार जिलों के पांच गांव चकबंदी से बाहर
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, गोरखपुर, अलीगढ़, प्रतापगढ़ और बुलंदशहर जनपदों के कुल पांच गांवों को धारा-6(1) के अंतर्गत चकबंदी प्रक्रिया से पृथक किया गया है।
इनमें गोरखपुर का करही गांव, जो 38 वर्षों से चकबंदी प्रक्रिया में लंबित था, अलीगढ़ का दहेली, प्रतापगढ़ के मिसिलरऊ एवं कमास तथा बुलंदशहर का करौना शामिल हैं।
पांच गांवों में धारा-52(1) के तहत चकबंदी पूरी
इसके अलावा जौनपुर के खपरह, महाराजगंज के विशुनपुर कुठिया एवं गुजरीलिया शंकर मिश्र, बस्ती के पेडार, संतकबीरनगर के रामपुर तथा कन्नौज के गढ़िया कछपुरा समेत कुल पांच गांवों में विशेष प्रयासों के बाद धारा-52(1) के तहत चकबंदी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
अधिकारियों के प्रयासों की सराहना
शासन की ओर से जारी सूचना में इन गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी कराने में जनपद स्तरीय अधिकारियों के प्रयासों को सराहनीय बताया गया है। लंबे समय से लंबित मामलों के निस्तारण से संबंधित गांवों के किसानों को भूमि संबंधी प्रक्रियाओं में सुविधा मिलने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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