लखनऊ, 23 जुलाई 2026। उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की विशेष टीम ने नकली दवाओं के खिलाफ बड़ी अंतरराज्यीय कार्रवाई करते हुए उत्तराखंड के देहरादून में संचालित एक अवैध दवा निर्माण फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई में भारी मात्रा में नकली दवाएं, पैकिंग सामग्री और दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी बरामद की गई। जब्त सामग्री की अनुमानित कीमत करीब एक करोड़ रुपये बताई गई है।
यूपी-उत्तराखंड की टीम ने मिलकर की कार्रवाई
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, नकली दवा फर्मों और विक्रेताओं के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत FSDA मुख्यालय की विशेष टीम ने क्राइम ब्रांच गाजियाबाद तथा उत्तराखंड FSDA अधिकारियों के साथ मिलकर कार्रवाई की। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर देहरादून के परवल क्षेत्र में स्थित एक परिसर पर छापा मारा गया।
फैक्ट्री में चल रहा था अवैध निर्माण
छापेमारी के दौरान परिसर से औद्योगिक स्तर की पैकिंग मशीन, स्ट्रिप मशीन, इंकजेट बेल्ट प्रिंटर, कंप्रेसर और हाई-वोल्टेज स्टेबलाइजर सहित कई उपकरण बरामद किए गए। इसके अलावा सेमी-फिनिश्ड टैबलेट, कैप्सूल, दवाओं के फिनिश्ड/सेमी-फिनिश्ड गुड्स, एल्युमिनियम फॉयल, रैपर और कार्टन भी मिले। इससे प्रथमदृष्टया परिसर में नकली दवाओं के निर्माण और उन्हें बाजार में भेजने की तैयारी का संकेत मिला।
नामी कंपनियों के नाम का इस्तेमाल
कार्रवाई में Clavactam 625 और Razo-D Capsules सहित विभिन्न दवाओं की पैकिंग सामग्री तथा Cipla, Dr. Reddy’s, Elder, Macro, Intas और Lupin जैसी कंपनियों के नाम वाले मास्टर कार्टन भी बरामद किए गए।
दो आरोपी गिरफ्तार
मामले में दर्ज FIR के तहत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। प्रेस विज्ञप्ति में गौरव त्यागी, राजेंद्र सिंह उर्फ अरुण टुंडा, विपिन भटनागर और विनय चंद के नाम कार्रवाई से जुड़े बताए गए हैं। राजेंद्र सिंह उर्फ अरुण टुंडा और विनय चंद की गिरफ्तारी का उल्लेख किया गया है।
लखनऊ से शुरू हुई जांच पहुंची देहरादून तक
इस कार्रवाई की कड़ी 19 जुलाई 2026 को लखनऊ के थाना अमीनाबाद में नकली औषधियों के भंडारण और खरीद-बिक्री से जुड़े मामले से जुड़ी बताई गई है। उस मामले में 43 प्रकार की नकली दवाओं के संबंध में कार्रवाई की गई थी। गोपनीय सूचना के आधार पर जांच टीम ने नेटवर्क के मुख्य आरोपियों तक पहुंचने के लिए अंतरराज्यीय स्तर पर कार्रवाई आगे बढ़ाई।
बिना लाइसेंस दवा निर्माण पर सख्त कार्रवाई
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बिना वैध औषधि निर्माण लाइसेंस के दवा निर्माण करना औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम, 1940 की धारा 18/27 के तहत उल्लंघन है। मौके से पांच औषधि नमूने जांच के लिए लिए गए, जबकि शेष दवाओं, मशीनरी, फॉयल और टैबलेट/कैप्सूल आदि को सील कर दिया गया। जब्त सामग्री की अनुमानित कीमत करीब ₹1 करोड़ आंकी गई है।
नकली दवाओं के नेटवर्क पर ‘जीरो टॉलरेंस’
FSDA के अनुसार विभाग मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश से प्राप्त निर्देशों के अनुरूप नकली दवाओं के कारोबार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर काम कर रहा है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नकली दवाओं के निर्माण, भंडारण और खरीद-बिक्री से जुड़े नेटवर्क का पता लगाकर उसके पूरे नेटवर्क को समाप्त करने के लिए विशेष टीमें सक्रिय रहेंगी।
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