लखनऊ, 7 अगस्त 2026। न्यायालयों में लंबित मामलों के शीघ्र और आपसी सहमति से समाधान के उद्देश्य से लखनऊ में ‘मध्यस्थता अभियान 3.0’ का प्रभावी संचालन किया जा रहा है। यह अभियान 1 अगस्त 2026 से 30 दिसंबर 2026 तक चलेगा।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के सचिव कुंवर मित्रेश सिंह कुशवाहा ने बताया कि यह अभियान सर्वोच्च न्यायालय के Mediation and Conciliation Project Committee (MCPC), राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली तथा उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (UPSLSA), लखनऊ के निर्देशों के अनुपालन में संचालित किया जा रहा है।
आपसी संवाद से विवादों का समाधान
अभियान का मुख्य उद्देश्य पक्षकारों के बीच आपसी संवाद, सुलह और समझौते के माध्यम से विवादों का शीघ्र, कम खर्चीला और स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है। मध्यस्थता एक स्वैच्छिक, गोपनीय और न्यायसंगत प्रक्रिया है, जिसमें पक्षकार अपनी सहमति से विवाद का समाधान प्राप्त कर सकते हैं। इससे समय और धन की बचत के साथ आपसी संबंधों को भी सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।
किन मामलों में मिल सकता है लाभ?
अभियान के तहत विभिन्न प्रकार के विवादों को मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाया जा सकता है। इनमें वैवाहिक एवं पारिवारिक विवाद, घरेलू हिंसा, मोटर दुर्घटना दावा वाद, चेक अनादरण, समझौता योग्य आपराधिक मामले, वाणिज्यिक विवाद, उपभोक्ता विवाद, निष्पादन कार्यवाही, ऋण वसूली, सेवा संबंधी मामले, विभाजन, बेदखली, भूमि अधिग्रहण तथा ऋण वसूली अपीलीय अधिकरण (DRT) के मामले शामिल हैं। इसके अलावा श्रम कानून तथा अन्य उपयुक्त सिविल एवं दीवानी विवादों का भी मध्यस्थता के माध्यम से निस्तारण कराया जा सकता है।
लोगों से मध्यस्थता का लाभ उठाने की अपील
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ने जनपदवासियों से अपील की है कि लंबी न्यायिक प्रक्रिया से बचने के लिए अधिक से अधिक संख्या में मध्यस्थता का लाभ उठाएं। मध्यस्थता की कार्यवाही जनपद न्यायालय परिसर, लखनऊ स्थित मध्यस्थता एवं सुलह केंद्र में प्रशिक्षित मध्यस्थों की सहायता से कराई जाएगी।
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