लखनऊ, 18 जुलाई। रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) से जुड़ी स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाएं इस वर्ष भी आकर्षक एवं हस्तनिर्मित राखियों का निर्माण कर रही हैं। इन राखियों की बाजार में अच्छी मांग है और इस बार इन्हें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देशों के क्रम में प्रदेश के विभिन्न जनपदों की ग्रामीण महिलाएं पारंपरिक एवं आधुनिक डिजाइनों की सुंदर राखियां तैयार कर रही हैं। प्रयागराज, वाराणसी, बागपत, बुलंदशहर, लखीमपुर खीरी, गोरखपुर, उन्नाव, शामली, जौनपुर और मिर्जापुर सहित प्रदेश के अनेक जिलों में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं इस कार्य में सक्रिय रूप से जुटी हुई हैं।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार की जा रही राखियां केवल महिलाओं की आय बढ़ाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण संस्कृति, भारतीय परंपरा और महिलाओं की रचनात्मक प्रतिभा को भी नई पहचान दे रही हैं। इससे ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को मजबूती मिलने के साथ-साथ महिला उद्यमिता और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के संकल्प को भी बल मिलेगा।
महिलाएं सूती धागे, रेशम, मोती, जरी, कुंदन, लकड़ी, कपड़े, अनाज और अन्य पर्यावरण अनुकूल सामग्रियों से विभिन्न प्रकार की आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। इन राखियों में भारतीय संस्कृति और पारंपरिक कला की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। स्थानीय बाजारों, मेलों और विभिन्न बिक्री केंद्रों के माध्यम से इनका विक्रय भी किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग, गुणवत्ता संवर्धन और डिजिटल मार्केटिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि ग्रामीण महिला उद्यमियों को व्यापक बाजार उपलब्ध हो सके और उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो। मिशन निदेशक अरुण कुमार के निर्देशन में इन हस्तनिर्मित राखियों को Amazon, Flipkart तथा e-SARAS जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की तैयारी भी की जा रही है, जिससे देशभर के ग्राहक इन्हें आसानी से खरीद सकें।
मिशन ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि रक्षाबंधन के इस पावन अवसर पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा निर्मित हस्तनिर्मित राखियों को प्राथमिकता दें। इससे ग्रामीण महिलाओं की आजीविका सशक्त होगी, महिला उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
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