लखनऊ, 3 जुलाई। उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के प्रावधानों का उल्लंघन करने के मामले में हाथरस नगर पालिका परिषद के तत्कालीन एवं वर्तमान चार जनसूचना अधिकारियों पर संयुक्त रूप से ₹25,000 का अर्थदंड अधिरोपित किया है। आयोग ने निर्देश दिया है कि अर्थदंड की राशि संबंधित अधिकारियों के वेतन से नियमानुसार वसूल की जाए।
आयोग के अनुसार यह मामला हाथरस निवासी श्री राम प्रकाश वार्ष्णेय द्वारा 8 जनवरी 2024 को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 6(1) के तहत दायर आवेदन से संबंधित है। आवेदक ने अपनी विभिन्न शिकायतों एवं पत्रों पर की गई कार्रवाई, संबंधित अभिलेखों तथा आदेशों की सत्यापित प्रतियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था।
सुनवाई के दौरान राज्य सूचना आयुक्त श्री स्वतंत्र प्रकाश गुप्त ने पाया कि आवेदक को मांगी गई सूचना समयबद्ध एवं बिंदुवार उपलब्ध नहीं कराई गई। आयोग ने यह भी पाया कि विभिन्न शिकायतों पर हुई वास्तविक कार्रवाई से संबंधित तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई तथा आयोग के समक्ष भी भ्रामक, अपूर्ण और विलंबित सूचना प्रस्तुत की गई।
आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जनसूचना अधिकारी का यह दायित्व है कि वह आवेदक को समय पर, सत्य, पूर्ण एवं तथ्यपरक सूचना उपलब्ध कराए। ऐसा न करना सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 20 के अंतर्गत दंडनीय है।
इस प्रकरण में आयोग द्वारा कई अवसर दिए जाने तथा कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने के बावजूद संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके आधार पर आयोग ने 24 जून 2026 को पारित आदेश के अनुपालन में संबंधित अधिकारियों पर संयुक्त रूप से ₹25,000 का अर्थदंड अधिरोपित किया।
जिन अधिकारियों पर अर्थदंड लगाया गया है, वे हैं—
- श्री आशुतोष कुमार सिंह, तत्कालीन उपजिलाधिकारी/अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद, हाथरस।
- श्री सुजय कुमार सिंह, तत्कालीन उपजिलाधिकारी/अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद, हाथरस।
- श्री अनुज कौशिक, तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त एवं तत्कालीन अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद, हाथरस।
- श्री रोहित सिंह, वर्तमान अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद, हाथरस।
आयोग ने आदेश की प्रति जिलाधिकारी, हाथरस तथा रजिस्ट्रार, उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग को आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रेषित करने के निर्देश भी दिए हैं।
राज्य सूचना आयोग ने अपने आदेश में दोहराया कि सूचना का अधिकार अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन प्रत्येक जनसूचना अधिकारी की वैधानिक जिम्मेदारी है। समय पर, सही एवं पूर्ण सूचना उपलब्ध न कराना अथवा अनावश्यक विलंब करना दंडात्मक कार्रवाई का आधार बन सकता है।
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